बजट 2024: भारतीय अर्थव्यवस्था की चार बैलेंस शीट चुनौती का समाधान जरूरी

घर बजट 2024: भारतीय अर्थव्यवस्था की चार बैलेंस शीट चुनौती का समाधान जरूरी

बजट 2024: भारतीय अर्थव्यवस्था की चार बैलेंस शीट चुनौती का समाधान जरूरी

2 जुल॰ 2024

भारतीय अर्थव्यवस्था की चार बैलेंस शीट चुनौती

भारतीय अर्थव्यवस्था की चार बैलेंस शीट चुनौती में बजट 2024 में समाधान की आवश्यकता है। यह चुनौती केवल एक आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि एक जटिल संरचनात्मक समस्या का रूप ले चुकी है। इसकी चर्चा सबसे पहले पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने 2018 में की थी। उन्होंने बताया था कि सरकार, रिजर्व बैंक, बैंक और कॉर्पोरेट क्षेत्र की तनावग्रस्त बैलेंस शीट्स पर ध्यान देना आवश्यक है।

सरकार की वित्तीय घाटा

सरकार की वित्तीय घाटा

सरकार की वित्तीय स्थिति का सबसे बड़ा सवाल वित्तीय घाटा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए यह लक्ष्य GDP का 5.9% रखा गया है। हाल के वर्षों में वित्तीय घाटा बढ़ा है और इसका सीधा प्रभाव देश की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि निवेश और खर्च के बीच संतुलन बना रहे, ताकि अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहे।

रिजर्व बैंक की विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की विदेशी मुद्रा भंडार में कमी एक गंभीर चिंता का विषय है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से भारत की विदेशी भुगतान संभावनाएं कमजोर होती हैं और इसकी वजह से देश की क्रेडिट रेटिंग पर भी असर पड़ सकता है। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों में अपने निवेश को लेकर चिंतित होते हैं, तब यह अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार हो।

बैंकों की नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs)

बैंकों की नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs)

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र अभी भी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) की समस्या से जूझ रहा है। बैंकों की ऐसी संपत्तियाँ जिनसे उन्हें कोई लाभ नहीं मिलता, उनकी वित्तीय स्थिरता को सीधा प्रभावित करती हैं। जब बैंक ऋण देने में सक्षम नहीं होते तो इसका असर कुल आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। NPA का समाधान निकालना इसलिए जरूरी है ताकि बैंकिंग क्षेत्र अपने प्राथमिक कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम दे सके।

कॉर्पोरेट सेक्टर का ऋण संकट

कॉर्पोरेट सेक्टर का ऋण संकट भी एक मुख्य चुनौती है। कई कंपनियाँ वर्तमान में अपने ऋणों को चुकाने में असमर्थ हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता प्रभावित होती है। यह संकट बड़े पैमाने पर उद्योगों और व्यवसायों की क्रेडिटवर्थीनेस को भी प्रभावित करता है।

बजट 2024: समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

बजट 2024: समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

बजट 2024 में इन चार बैलेंस शीट चुनौतियों का समाधान ढूँढना भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और विकास के लिए आवश्यक है। सरकार को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने, रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने, बैंकों को NPAs घटाने और कॉर्पोरेट क्षेत्र को ऋण संकट से उबारने के उपाय करने होंगे। यह समय है कि नीति निर्माता एक ठोस और व्यापक योजना तैयार करें, जिससे अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख क्षेत्रों को लाभ हो सके।

चारों बैलेंस शीट की समस्याएं परस्पर जुड़ी हुई हैं। इसलिए इन्हें एक समग्र दृष्टिकोण से देखना और समाधान निकालना जरूरी है। छोटे कदम भी बड़ी समस्याओं को हल करने में सक्षम होते हैं यदि वे सही दिशा में उठाए जाएंगे। नीति निर्माताओं को न केवल मौजूदा समस्याओं पर ध्यान देना होगा, बल्कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा।

बजट 2024 भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है यदि यह स्मार्ट और स्थायी समाधानों पर ध्यान केंद्रित करता है।

टिप्पणि
Priyanshu Patel
Priyanshu Patel
जुल॰ 2 2024

ये सब तो बस चार बैलेंस शीट की बात है लेकिन असली समस्या तो ये है कि हम लोग अपने घरों में भी बजट नहीं बना पाते। क्या सरकार जानती है कि एक आम इंसान के पास आज ब्रेकफास्ट के लिए भी पैसे नहीं हैं?

Gaurav Singh
Gaurav Singh
जुल॰ 3 2024

वित्तीय घाटा 5.9% है तो क्या हुआ अब तो दुनिया भर में कोई भी देश 3% से कम घाटे में नहीं चल पा रहा अगर ये बात असली समस्या होती तो अमेरिका तो बस गिर जाता। असली बात तो ये है कि हमारे बैंक अभी भी 2015 के डेटा पर काम कर रहे हैं

ashish bhilawekar
ashish bhilawekar
जुल॰ 3 2024

बैंकों के NPAs घटाने के लिए तो सिर्फ एक ही जवाब है - जो लोग ऋण लेकर चुकाने का नाम नहीं लेते उनके घरों की जमीन छीन लो और उनके बच्चों को बिना पढ़े बिना पढ़े नौकरी दे दो जिससे वो भी बैंक के ऋण लेकर फिर से उसी चक्र में फंस जाएं। ये है भारत की अर्थव्यवस्था की जान!

Vishnu Nair
Vishnu Nair
जुल॰ 5 2024

क्या आप जानते हैं कि विदेशी मुद्रा भंडार की कमी का असली कारण वो चार देश हैं जो अपने गुप्त एजेंट्स के जरिए भारत के रुपये को डंप कर रहे हैं? ये लोग एक वैश्विक फंड बनाकर भारत के बैंकिंग सिस्टम को नष्ट करने की योजना बना रहे हैं। और ये सब चीन और अमेरिका के बीच छिपी हुई लड़ाई का हिस्सा है। आपको पता है कि आखिरी बार जब रिजर्व बैंक ने डॉलर खरीदे थे तो उसके बाद एक व्यक्ति ने एक लाख रुपये का इन्वेस्टमेंट बंद कर दिया था और उसके बाद एक बैंक में एक डॉक्यूमेंट गायब हो गया था। ये सब जुड़ा हुआ है।

Kamal Singh
Kamal Singh
जुल॰ 6 2024

अगर हम बैंकों के NPAs को समझना चाहते हैं तो पहले ये देखना होगा कि बैंक ने किस तरह के लोगों को लोन दिया। क्या वो छोटे उद्यमी थे या बड़े लोग जिनके पास जमीन और गाड़ियाँ थीं? जब हम ये बात समझ जाएंगे तो तब पता चलेगा कि समस्या बैंकिंग सिस्टम में नहीं बल्कि नीति में है। एक छोटा सा सुधार - जैसे कि लोन देने के बाद एक ट्रैकिंग सिस्टम लगाना - बहुत कुछ बदल सकता है।

Jasmeet Johal
Jasmeet Johal
जुल॰ 6 2024

सब बहुत बढ़िया लिखा है लेकिन जब तक हम अपने घरों में बिजली बंद नहीं करते तब तक कोई बजट नहीं बचेगा

Abdul Kareem
Abdul Kareem
जुल॰ 8 2024

मैं तो सिर्फ ये पूछना चाहता हूँ कि इन चारों बैलेंस शीट्स को एक साथ देखने की बजाय क्यों नहीं अलग-अलग देखा जाता? क्या ये सब एक साथ ही ठीक हो जाएगा या फिर एक को ठीक करने से दूसरा खराब हो जाएगा?

Namrata Kaur
Namrata Kaur
जुल॰ 9 2024

बजट में बस एक चीज़ चाहिए - जो लोग बचत करते हैं उन्हें बचत करने का मौका दो। बाकी सब बकवास है।

indra maley
indra maley
जुल॰ 11 2024

हम जब तक ये नहीं समझेंगे कि अर्थव्यवस्था कोई गणितीय समीकरण नहीं बल्कि एक जीवित प्रणाली है जिसमें इंसानों के भावनाएँ, डर और आशाएँ शामिल हैं तब तक हम सिर्फ बैलेंस शीट्स के नंबरों में खो जाएंगे। जब एक आदमी अपने बच्चे के लिए बचत करता है तो वो उसकी आत्मा की बचत है।

Kiran M S
Kiran M S
जुल॰ 12 2024

आप सब बहुत बुद्धिमान लगते हो लेकिन क्या आपने कभी एक बैंक के लॉबी में बैठकर देखा है कि कैसे एक बैंक ऑफिसर एक ग्रामीण आदमी को लोन देने से मना कर देता है? ये सब बैलेंस शीट्स तो बस एक शो है जो बैंकों के बाहर चल रहा है। असली दुनिया तो वहाँ है जहाँ लोग अपनी जिंदगी जी रहे हैं।

Paresh Patel
Paresh Patel
जुल॰ 12 2024

मैं तो बस ये कहना चाहता हूँ कि हम जितना भी बात करें लेकिन अगर हम खुद अपने घर में बचत नहीं करेंगे तो कोई बजट भी काम नहीं करेगा। एक रुपया बचाना भी बड़ी बात है। आज से ही शुरू कर दीजिए।

anushka kathuria
anushka kathuria
जुल॰ 14 2024

बजट 2024 के लिए सरकार को वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट रास्ता बनाना चाहिए। यह बहुत जरूरी है कि नीतियों का लक्ष्य स्थायी विकास हो और केवल चुनावी लाभ नहीं। यह एक जिम्मेदारी है जिसे लेकर गंभीरता से सोचना चाहिए।

Noushad M.P
Noushad M.P
जुल॰ 16 2024

NPAs का मतलब है लोगों के लोन न चुकाना लेकिन अगर बैंक ने उन लोगों को लोन देना ही बंद कर दिया तो क्या होगा? मैंने अपने दोस्त को एक बैंक में लोन लेने के लिए बोला था और उसे बोला गया कि आपका क्रेडिट स्कोर बहुत कम है। लेकिन उसका क्रेडिट स्कोर इसलिए कम है क्योंकि उसके पास कोई लोन नहीं था। ये तो बहुत अजीब है।

Sanjay Singhania
Sanjay Singhania
जुल॰ 17 2024

समस्या ये नहीं कि बैलेंस शीट्स तनावग्रस्त हैं बल्कि ये है कि हमारी अर्थव्यवस्था का आधार ही एक फ्रेमवर्क पर बना है जो 1991 के बाद से बदला नहीं। हम आज भी एक ऐसे सिस्टम के साथ जुड़े हैं जिसमें बैंकिंग एक अर्थव्यवस्था की जगह एक वित्तीय गेम है। हमें एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम चाहिए।

Raghunath Daphale
Raghunath Daphale
जुल॰ 18 2024

ये सब बकवास है। जब तक तुम्हारे पास एक बैंक अकाउंट नहीं है तो तुम्हें ये सब पढ़ने की जरूरत नहीं। बस अपना खाना खा ले और अपने बच्चों को पढ़ा दे। बाकी सब तो बस एक नाटक है।

Renu Madasseri
Renu Madasseri
जुल॰ 19 2024

मैं एक छोटे शहर से हूँ और हमारे यहाँ एक बैंक ऑफिसर ने मेरे दोस्त को लोन दिया जब उसने अपनी दुकान के लिए आवेदन किया। उसके बाद उसकी दुकान चलने लगी और अब वो अपने बच्चे को पढ़ा रहा है। बैंकिंग जब इंसानों के लिए होती है तो ये सब बैलेंस शीट्स भी ठीक हो जाते हैं।

Aniket Jadhav
Aniket Jadhav
जुल॰ 20 2024

मैंने एक बार एक छोटे उद्यमी के साथ काम किया था जिसके पास लोन नहीं था लेकिन उसके पास एक अच्छा आइडिया था। उसने अपने दोस्तों से पैसे जुटाए और अपना बिजनेस शुरू किया। अब वो एक बड़ी कंपनी चला रहा है। बैंक बिना लोन के भी काम चल सकता है।

Anoop Joseph
Anoop Joseph
जुल॰ 21 2024

हमें बस ये जानना है कि हमारे बच्चे के लिए क्या बेहतर है। बाकी सब बस बातें हैं।

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