जब डोनाल्ड ट्रम्प, अमेरिका के राष्ट्रपति हैं ने शुक्रवार को दावा किया कि ईरान ने अपने परमाणु भंडार को अमेरिका सौंपने के लिए राजी हो गया है, तो दुनिया भर के राजनयिक हैरान रह गए। यह दावा तब आया जब दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति और तनाव चरम पर है। ट्रम्प का कहना है कि एक बड़े शांति समझौते के तहत ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) अमेरिका को सौंप देगा, लेकिन ईरान ने इसे सिरे से खारिज करते हुए इसे अपनी 'पवित्र मिट्टी' जैसा बताया है।
हकीकत यह है कि दोनों देशों के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर है। एक तरफ वॉशिंगटन इसे जीत बता रहा है, तो दूसरी तरफ तेहरान इसे सरासर झूठ। यह खींचतान सिर्फ शब्दों की नहीं है, बल्कि दुनिया की सुरक्षा और परमाणु हथियारों की दौड़ से जुड़ी है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प इस डील को पूरा होने के बस एक या दो दिन दूर बता रहे थे, लेकिन ईरान की प्रतिक्रिया ने इस दावे की हवा निकाल दी। (सोचिए, अगर यह सच होता तो यह सदी का सबसे बड़ा राजनयिक उलटफेर होता)।
परमाणु 'धूल' और ट्रम्प के बड़े दावे
शुक्रवार को CBS News को दिए एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान "हर चीज के लिए सहमत" हो गया है। उन्होंने करीब 900 पाउंड बम-ग्रेड यूरेनियम के ट्रांसफर की बात कही, जिसे उन्होंने मजाकिया लहजे में "न्यूक्लियर डस्ट" (परमाणु धूल) करार दिया। ट्रम्प के मुताबिक, यह ईरान के "परमाणु साम्राज्य की चाबियां" सौंपने जैसा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका इसके बदले में एक डॉलर या 10 सेंट भी खर्च नहीं करेगा। यानी, ईरान बिना किसी वित्तीय मुआवजे के अपना सबसे कीमती रणनीतिक हथियार अमेरिका को दे देगा। लेकिन क्या वाकई ऐसा संभव है? ईरान के आधिकारिक प्रवक्ता ने तुरंत इस दावे को खारिज कर दिया। एक सरकारी समाचार एजेंसी ने स्पष्ट किया कि संवर्धित यूरेनियम ईरान के लिए उतना ही पवित्र है जितनी उनकी मिट्टी, और इसे कभी सरेंडर नहीं किया जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर रस्साकशी
तनाव सिर्फ यूरेनियम तक सीमित नहीं है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों पक्षों की अलग-अलग कहानियां हैं। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि यह रास्ता "पूरी तरह खुला" है और डील का हिस्सा है।
परंतु, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक प्रतिनिधि ने साफ कर दिया कि रास्ता खुला तो है, लेकिन वह ईरान के नियंत्रण में रहेगा। सीधा सा मतलब यह है कि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी पकड़ ढीली करने को तैयार नहीं है। IRGC अभी भी वहां से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी करेगा, जो ट्रम्प के "पूरी तरह खुला" होने के दावे को चुनौती देता है।
युद्धविराम और सोमवार की अहम बैठक
समय अब बहुत कम बचा है। वर्तमान युद्धविराम मंगलवार को समाप्त होने वाला है। इस बीच, सोमवार को दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत तय की गई है। माहौल तनावपूर्ण है क्योंकि एक तरफ अमेरिका शांति समझौते की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ खुफिया रिपोर्टें कुछ और ही इशारा कर रही हैं।
एक तरफ ट्रम्प का कहना है कि ईरान "सैन्य रूप से तबाह" हो चुका है और अब उसके पास केवल होर्मुज जलडमरूमध्य का कार्ड बचा है। लेकिन अमेरिकी कांग्रेस में पेश की गई खुफिया रिपोर्ट बताती है कि ईरान के पास अभी भी कई रणनीतिक विकल्प मौजूद हैं और वह जरूरत पड़ने पर लंबे समय तक युद्ध झेल सकता है। यह विरोधाभास दिखाता है कि ट्रम्प की बयानबाजी और जमीन की हकीकत में बड़ा अंतर है।
इसी बीच, अमेरिका ने रूसी तेल की बिक्री के लिए दी गई छूट (waiver) को एक और महीने के लिए बढ़ा दिया है। यह कदम शायद इसलिए उठाया गया ताकि बातचीत के दौरान लचीलापन बना रहे और तेल बाजार में अचानक कोई बड़ा झटका न लगे।
ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दा दशकों पुराना है। 2015 का JCPOA समझौता और फिर ट्रम्प प्रशासन द्वारा उससे बाहर निकलना, इस पूरी दुश्मनी की जड़ है। ईरान हमेशा से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता आया है, जबकि अमेरिका इसे परमाणु बम बनाने की कोशिश मानता है।
अब सवाल यह है कि क्या सोमवार की बातचीत कोई रास्ता निकाल पाएगी? या फिर मंगलवार की समय सीमा खत्म होते ही तनाव एक बार फिर युद्ध की ओर बढ़ जाएगा? जिस तरह से ईरान ने यूरेनियम ट्रांसफर के दावे को ठुकराया है, उससे लगता है कि "शांति समझौता" अभी बहुत दूर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
डोनाल्ड ट्रम्प के दावे और ईरान की प्रतिक्रिया में मुख्य अंतर क्या है?
ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान बिना किसी पैसे के अपना 900 पाउंड संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपने पर सहमत हो गया है। इसके विपरीत, ईरान ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यूरेनियम उनकी पवित्र मिट्टी की तरह है और वे इसे कभी नहीं देंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का इस विवाद में क्या महत्व है?
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग है। ट्रम्प इसे 'खुला' बता रहे हैं, जबकि ईरान का IRGC कह रहा है कि वह इस मार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर ईरान का प्रभाव बना रहेगा।
क्या ईरान वाकई सैन्य रूप से तबाह हो चुका है?
ट्रम्प ऐसा दावा कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने कांग्रेस को बताया है कि ईरान के पास अभी भी महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षमताएं हैं और वह एक लंबा युद्ध लड़ने में सक्षम है।
अगले कुछ दिनों में क्या महत्वपूर्ण घटनाक्रम होने वाले हैं?
सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण बातचीत होनी है, जबकि वर्तमान युद्धविराम की समय सीमा मंगलवार को समाप्त हो रही है। यह तय करेगा कि तनाव कम होगा या युद्ध फिर शुरू होगा।
रूसी तेल की छूट (Waiver) का इस स्थिति से क्या संबंध है?
अमेरिका ने रूसी तेल की बिक्री की छूट को एक महीने के लिए बढ़ाया है। यह कदम संभवतः शांति वार्ता के दौरान वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखने और बातचीत के लिए लचीलापन देने के लिए उठाया गया है।